रामलला के सूर्य अभिषेक की तैयारी, दिल्ली और कनार्टक से लाए जा रहे फूल (देखें विडियो)


गणेश कुमार स्वामी   2024-04-15 02:24:28



लंबे समय इंतजार के बाद जब रामलला अपनी जन्मभूमि पर अपने जन्मदिन पर बधाई गीत सुनेंगे और सूर्य की किरणें उनका अभिषेक करेंगी। अपने जन्मदिन पर रामलला चांदी और सोने के तारों से बुना विशेष डिजाइनर वस्त्र पहनेंगे। इसे दिल्ली से विमान के जरिए लाया जाएगा। इसी तरह उनके श्रृंगार में और मंदिर को सजाने के लिए खास तरह के पुष्प दिल्ली और कर्नाटक से लाए जाएंगे। इन फूलों की खास बात यह है कि यह एक सप्ताह तक मुरझाते नहीं है। बधाई गीत गाए जाएंगे। वेदों और पुराणों का पाठ होगा। भोग के लिए 56 प्रकार के विशेष पकवान बनाए जाएंगे। यानि हर तरफ हर्ष और उल्लास का वातावरण होगा। यह जन्मोत्सव से 2 दिन पहले ही शुरू हो जाएगा।

17 अप्रैल को होगा रामलाल का सूर्य अभिषेक

उस समय श्री राम जन्मभूमि मंदिर ही नहीं बल्कि पूरी अयोध्या रामलला के जन्मदिन पर सज धज कर उनका अभिनंदन कर रही होगी। यहां तक कि भगवान सूर्य भी अपनी किरणों से उनका अभिषेक करते दिखाई देंगे। ट्रस्ट द्वारा रामनवमी के उतसव में हर्षो उल्लास में कोई कमी ना रहे उसकी व्यवस्था में लगा हुआ है।

रामजन्मोत्सव की सबसे खास बात यह होगी कि उस दिन सूर्य भगवान स्वयं श्रीराम जी का 12:00 बजे अभिषेक करेंगे।

अयोध्या में सजावट की तैयारी शुरु

जन्मदिन के उत्साह में डूबे राम भक्त जब 12:00 बजे गर्भगृह का पर्दा हटाने के बाद उनका दर्शन करेंगे। तो वह समय अद्भुत होगा। फूलों से पूरा मंदिर सजाया जा रहा है। अष्टमी से पहले अयोध्या पूरी सजकर तैयार हो जाएगी। अष्टमी से लेकर नवमी और दशमी के दिन तक यह हर्ष उल्लास और सजावट होगी। 

कैसे होगा सुर्याभिषेक

17 अप्रैल को श्रीरामनवमी पर श्रीराम मंदिर में सूर्य की किरणें श्रीरामलला का अभिषेक करेंगी। दरअसल, मंदिर की तीसरी मंजिल पर लगे ऑप्टोमैकेनिकल सिस्टम से श्रीरामनवमी पर दोपहर के समय सूर्य की किरणें गर्भगृह तक पहुंचेंगी। यहां, किरणें एक दर्पण से प्रतिबिंबित होंगी, जिससे 75 मिमी का गोल तिलक 4 मिनट के लिए सीधे रामलला के माथे पर पड़ेगा।

यह अनोखा सूर्य तिलक आईआईटी रूड़की के मेहनती प्रयासों से संभव हुआ है। मंदिर के पुजारी अशोक उपाध्याय ने बताया, कि गर्भगृह के तीसरे तल पर सूर्य तिलक का वैज्ञानिक उपकरण लगाया गया है। इसके दो ट्रायल लिए जा चुके हैं। 

उपकरणों का लेआउट

परियोजना वैज्ञानिक देवदत्त घोष ने बताया, कि यह सेटअप सौर ट्रैकिंग के सिद्धांतों पर काम करता है, जिसमें एक परावर्तक, दो दर्पण, तीन लेंस और एक पीतल के पाइप का उपयोग किया जाता है। सूर्य की किरणें छत पर लगे रिफ्लेक्टर पर पड़ती हैं और फिर पहले दर्पण की ओर निर्देशित होती हैं, जहां से वे नीचे की ओर परावर्तित होती हैं। प्रत्येक मंजिल पर किरणों का मार्गदर्शन करने के लिए एक लेंस होता है, जो पीतल के पाइप के माध्यम से दूसरे दर्पण तक जाता है। अंत में, दूसरा दर्पण गर्भगृह के भीतर श्रीराम लला के सामने स्थित होता है, जिससे सूर्य की किरणें श्रीराम लला का अभिषेक कर पाती हैं।

विडियो लिंक - https://twitter.com/i/status/1778768465010340335